तुम जा चुकी हो। ये जानता हूँ मैं, लेकिन मुझे उस दिन का इंतज़ार है। जब तुम मुझे फिर एक बार वहां मिलोगी, जहाँ हम पहली बार मिले थे।
शायद तुम मुझे वहाँ देख कर हैरान हो जाओगी और जैसे-जैसे मेरे क़दम तुम्हारी और बढ़ेंगे। तुम्हारे चहरे की वो हैरानी, मद्धम सी मुश्कान मे बदल जायेगी। हाँ! बिल्कुल उसी मुश्कुराहट की जैसी, जब पहली बार तुम्हे देखा था तो तुम्हारे चहरे पे थी और फिर हम दोनों की आँखों से वो दर्द छूठ के बेह्जयेगा,जिसे हम दोनों ने गुज़रे सालो से अपने दिल मे थाम के रखा है। हाँ! उस दिन जब हम मिलेंगे।

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