बाते,वादे, कस्मे,तुम्हारा गुस्सा, सब कुछ याद है मुझे! क्या तुम्हे वो मुश्कुराहट याद है। जो तुमने मुझे दी थी।
जा तो रही हो,बस वो मुश्कुराहट लौटाती जाओ...
आज फिर वो वक़्त के एक ऐसे मोड़ पे था। जहाँ से उसे एक नयी शुरूवात करनी थी। बिना किसी हमसफ़र के...
~आर.के. कश्यप~
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